The second birth:by ART OF LIVING-उपनयन विधी से -इसी जन्म मे और एक नया जन्म
जय गुरुदेव !
उपनयन (मुंज) करके मैने इसी जन्म मे और एक नया जन्म ले लिया
.वैसे बचपन से यही सोचता था , किसी एक पद (जैसे,डॉक्टर,इंजिनीयर ) या उपाधी(लेखक ,कवी ,वैज्ञानिक,) मे मर्यादित ना रहू
इसीलिये ,जब भी कोई (टीचर )
मुझे पुछता ‘’बडा होकर क्या बनेगा?’’
मै क्या बताता बस चूप रहता या फिर कहता ‘’कुछ भी नही ‘’(TEACHER:-’’you are aimless’’)
मुझे लगता अगर मी डॉक्टर बनूंगा तो किसी चांदनी रात मे घर के छत पर या खेतो मे जाकर उस चांदनी मे घंटो नही बैठ सकता ,मेरी स्वतंत्रता नष्ट हो जायेगी.
दुसरी बात कोई मुझपर कवी, लेखक या गायक का लेबल हमेशा के लिये लगाकर मर्यादित करे ये मुझे आज भी पसंद नही है.
लेकीन ब्राह्मण एक अमर्याद अवस्था है क्यो कि ज्ञान कि कोई सीमा नही है
ब्राह्मण लौकिक और पारलौकिक जीवन एक साथ जीता है इस लिये वह यह भी देख (जानता )सकता है कि --- ‘’जीवन की भी कोई सीमा नही है’’
ब्राह्मण धरती पर अपने परिवार और आप्त जनो के साथ साथ समुचे राष्ट्र और विश्व कल्याण की मंगल कामना करता है
वह स्वर्गीय देवताओ को आवाहन करता है उनसे संवाद कर सकता है
वह वह सूर्य तथा माता गायत्री से प्रकाश(ज्ञान-विज्ञान ) मांगता है
और गंधर्वोका स्वर्गीय संगीत धरती पर ले आता है
इसलिये समस्त सृष्टी के लिये स्वयं ब्राह्मण एक वरदान है !
यह प्रकट करने वाला मै कोई अंध विश्वासी नही हू ,यह सब मैने अनुभव किया है ,मैने जीवन मे इतने सारे वरदान पाये है लेकीन उसपर गर्व नही कर सकता ,जानता हू कर्ता -करविता(करावाने वाला)कोई और है
मैने --
१) गीत --(१०० के आसपास रचनाये )
२)संगीत (३-अल्बम -और संगीत नाटक की सभी १२ रचनाये--सभी प्रकार यांनी लोक संगीत,भाव गीत ,वेस्टर्न )
३)गायन (उत्तरा केळकर के साथ द्वंद्व गीत भी उपरोक्त अल्बम और संगीत नाटक के लिये गायन )
३)नाट्य लेखन (दो संहिताइए लिखी है--१८ शो किये है )
४)नाट्य-निर्देशन
इसके आलावा --
१)केमेस्ट्री पढांतां हू(आर्ट ,कॉमर्स ,साहित्य )
२)१०० से जादा blog लिखे
यह सब इसलिये लिखा है की ,अगर हम जन्म से ब्राह्मण नही है तो कोई बात नही,मुझे दिक्षा देने वाले श्रद्धेय स्वामी संतोष जी ने कहा है
-जन्म से कोई ब्राह्मण नही होता
- संस्कार से (उपनयन)होता है
--ब्राह्मण होने का अधिकार सब को है !
आजतक जो सिर्फ जन्म से था अब कर्म से हो गया !!
यह बदलाव ( क्रांती) Art of living ने किया !
यह सब गुरुजी //श्री श्री रविशंकर // ने किया !!! 

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