आरक्षण और करप्शन --तरक्की के दुश्मन

पहले - जातिगत आरक्षण हटाने का फुलप्रूफ प्लान बताते  है 
जातिगत आरक्षण उसका प्रत्यक्ष विरोध करने से खत्म नही होगा क़्यु कि मंडल  आयोग द्वारा समाज कि लगभग हर जाती  को वोट बँक बनाके  उसमे शामिल  किया गया है .शतरंज का जो कच्चा खिलाडी होता है  वो प्यादे के बदले प्यादा लेता है . और पक्का खिलाडी  ऐसे मे  दुसरे साईड से आक्रमण करता है  . इस सूत्र का व्यावहारिक रूप यह होगा -
जातिगत आरक्षण के बदले दस एकर से कम जमीन वाले सभी जाती धर्म के किसानों को महज १० % आरक्षण(सिर्फ निम्न श्रेणी पदोंपर ) कि मांग रखना.
किसानों कि आत्म हत्या वो  के मद्दे नजर इसको कोई विरोद्ध नही करेगा,मिडिया का भी सपोर्ट मिलेगा लेकिन पोलिटीकल पार्टिया  फिर भी (चाहकर भी) सपोर्ट नही कर सकती.(वोट बँक खिसकने का डर) 
इसलिये एक नयी पार्टी  का गठीत  करनी   होगी   
इस पार्टि मे कुछ प्रभाव शाली ( चालाक) किंतू दुर्भाग्य से जो साइड  मे पडे है ऐसे नेतावोको जोडना  चाहिये. ऐसे नेतावो की कमी नही है (उदाहरणार्थ अभी अभी -अरुण शौरी,योगेंद्र यादव,तथा शत्रुघ्न सिन्हा जैसे नेता भी इसके लिये  उपयुक्त बने है .) इनको लेने से मिडीया के  जरीये  यह मांग तूल पकडेगी,और लोगो मे विश्वास बढेगा कि ऐसा हो सकता है. यह पार्टी ‘’आआप’’ का भी बाप शाबित हो सकती है लेकिन  उसमे आरक्षण(जातिगत) के बदले किसान आरक्षण(भूमी हीन तथा १० एकरसे काम खेती वाले के लिये )पर जोर हो . ऐसा करणे से इस आंदोलन को नैतिक समर्थन मिलेगा और स्वार्थ परायण लोग भी इसका समर्थन करेंगे,क्यू कि इसमे सभी जातियोंके पिछाडे और आगडे तो आयेंगे हि मुस्लिम भी आपने आप आयेंगे  और इस तरह एक नयी वोट बँक बन सकती  है . आरक्षण से फायदा बहोत कम लोगोंको होता है लेकिन यह एक लॉटरी  कि तरह  होता है,लॉटरी लगती एक की लेकिन उसके पीछे लाखो लोग लग जाते  है. हमारे देश के जादातर लोग देश का सोचने के बजाय  अपने फायदे का हि सोचते है और उनका समर्थन भी उसी दिशा मे होता है. तभी तो बहोत सी आगडी  जातीया भी आरक्षण मांग रही है,वास्तवीक उन लोगोंको आरक्षण का विरोध करना चाहिये.   
 अगर इन बातो पर गौर किया तो समझ  मे आता है की आरक्षण हटाना कोई आसान काम नही है अगर इस देश से आरक्षण हट गया तो उसे क्रांती का नाम दिया जायेगा शायद ’’अनारक्षण क्रांती’’     
स्वार्थ एक ऐसी शक्ती है जिसे सिर्फ स्वार्थ से ही पराजित किया जा सकता है. इसलिये आरक्षण हटाने  के लिये  ऐसे दावपेंच कि जरूरत है जैसे लोहा लोहे को काटता है .
महत्व पूर्ण मुद्दे --
१)पार्टी के नाम मे “”आरक्षण विरोध’’  शब्द बिलकूल ना हो उसके बजाय किसान ,भूमिपुत्र,स्वदेश  ऐसे शब्द हो या फिर ‘’अनारक्षण क्रांती’’  ?
२) ‘’गरीब-आरक्षण’’जादा समर्थनीय नही बनता  क्यू की.,भ्रष्टाचारी व्यवस्था मे गरिबी का certificate आसानी से मिल सकता है  और गरीब का अमीर मे और अमीर का गरीब मे रुपांतर होते रहता  है ऐसे मे इसकी संघटीत और स्थिर वोट बँक नही बन सकती .
***३)इसमे ,''सरकारी किसान'' यांनी किसानो को सरकारी नौकारीया जैसा बेहद आकर्षक  नया मुद्दा(विचार) जोडना  चाहिये >(इसके  लिये स्कूल तथा महाविद्यालय स्तर के  पुस्तको मे कृषी कार्य नामक नया विषय शामिल करणे की मांग करे)
४)आरक्षण को पर्याय देना जरुरी है उसको बुरा भला कहने से सिर्फ कभी ना खत्म होणे वाला संघर्ष निर्माण होता है और आरक्षण नाम की  यह वास्तविक विषमता ज्यो कि त्यो बनी रहती है 
***फेसबूक के MODERN KISAN ग्रुप पर इसके बारे मे विस्तृत जानकारी उपलब्ध है      
उंची जाती ,पिछाडी जाती, अल्पसंख्यांक,किसान सबकी तरकी आज भी बहुत मंद गतीसे हो रही है जो असंघटीत है उनकी तो हालत उन्हे आत्महत्या करने  को मजबूर कर रही है. 
क्या अपने कभी सुना है किसी महापिछाडी जाती के मनुष ने पिछडी जाती का होणे के कारण आत्महत्या की  है?
लेकिन किसान तो ,'किसान' होने  कि वजह से हि आत्महत्या कर रहा है ,तो फिर सही मानो मे पिछडा  या दलित कौन है ?पिछडे वर्ग के(sc /st) अमीर से अमीर को भी आरक्षण सहुलते दियी जाती है ,इसके पीछे यह तर्क दिया जाता ही के उनके पास पैसे होते हुवे भी उन्हे मान सन्मान नही दिया जाता,मतलब उंचा पद देकर(चाहे वह लायक हो या न हो )उन्हे दुसरे (जीन्होने मेहनत से उंचा पद पाया है)के बराबर लाने की बात रखते है. 
लेकिन यह गलत और अन्याय कारक है,क्यू कि मान पान के पहले आता है खान पान ,किसानो के पास उदरनिर्वाह का प्रश्न है,जो अन्न वस्त्र जैसी मुलभुत समस्या के लिये जुझ रहा ही क्या वह सबसे जादा दलित ,पिडीत नही है,क्या वही एकमात्र आरक्षण का हकदार नही है?
जो लोग स्वार्थ मे डूबे है,वे इस सचाई का स्वीकार नही कर सकते . हमारें देश मे स्वार्थ  को सचाई मानकर उसका पक्ष लेने  कि बिमारी बहुत हि प्राचीन है ,इसी लिये तो इतने  बडे  महाभारत युद्ध के बहाने भगवान श्री कृष्ण ने  सिर्फ एक ही  तत्व हमारे सामने रखा ,जरा सोचीये महाभारत दुनिया का एक महाग्रंथ है लेकीन उसमेसे सिर्फ एक  महत्व पूर्ण उपदेश मिलता  है वह क्या है --
   ''अपना ,पराया-फायदा, नुकसान की पर्वाह किये बगैर सचाई का साथ देना  चाहिये''
     मतलब अगर आप किसी आरक्षण प्रवर्ग मे आते है ,और  
एकबार आप समझ गये  -- 
'आरक्षण  देश के लिये हानिकारक  है '           
 'जो सचमुच गरीब(उंची जाती ) उनके लिये  अन्याय कारक है'
''जो मेहनती और गुणवान है उनके लिये भेदभावपूर्ण  है '  
तो- आपके सामने दो पर्याय है
आरक्षण का विरोध या समर्थन -तो जीवन के इस महाभारत मे आप कौनसे पक्ष के साथ रहेंगे ?जीवन मे हम बहुधा स्वार्थ(मतलब )के बाजू मे खडे रहते है और उसीके  समर्थन  मे शाब्दिक वाद करते है,लेकीन मन तो जानता है कि सच क्या है.        
अगर करप्शन  मा है तो बाप है आरक्षण .
    उसका समर्थन नही; विरोध करना  चाहिये  

जी हा देश की लगभग सभी समस्या ओ का कारण या जड़ करप्शन    और आरक्षण है .करप्शन   की वजह से देश किस तरह बरबाद हो रहा है ये तो सभी जानते है .लेकिन इमानदार ,मेहनती और काबिल लोगो को प्रशासन और सत्ता से बहार फ़ेंक कर भेदभाव को बढाने वाला रोग है आरक्षण .किसी भी पद पर जब कम काबिल कर्मचारी या मंत्री /प्रधान मंत्री होता है तो वह खुद तो भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है ही लेकिन उसके कुप्रशासन  की वजह से भ्रष्टाचार और बढ़ ज्याता है  ,ये बात बहोत कम लोग समझ सकते है .
यानि आरक्षण खुद भष्टाचार का एक कारण है इस लिए ज्यादा भ्रष्ट पार्टिया ज्यादा आरक्षण  का लालच दिखाती है ,क्यों की आरक्षण समर्थक देश हित के बजाय जाती हित  को महत्व देते है ,यानि मानो  वो ऐसा कहते है '',चाहे भ्रष्टाचार करो या देश को लूटो ,लेकिन  भेद भाव की निति अपनाकर हमारे जाती को आगे बढ़ने का अवसर दो''और इसी के तहत ये आरक्षण प्रेमी सबसे ज्यादा भ्रष्ट पार्टी को इकठा वोट करते हुए बार बार  जिताते है .वो जानते है की अगर कोई पार्टी देश को बलवान बनाना चाहेगी तो वह आरक्षण और जाती के  आधार  पर भेद भाव करना बंद करके सिर्फ गुणवता पर आधारित समान न्याय वाली प्रणाली लाएगी ,जो की इन्हें बिलकुल पसंद नहीं .क्या  ये बात सच नहीं? .
मुस्लिम तुष्टिकरण के पीछे भी ,आरक्षण वाली मानसिकता ही है ,भ्रष्ट पार्टी को इसका बहुत फायदा होता है.
हमारा संविधान कहता है ''स्वतंत्रता ,समता ,और बंधुता''उसकी नीव है ..बाकी  सब  ठीक है लेकिन ''समता'' किधर है ? 
 संविधान के एक अन्य  कलम  के आधार पर ,जाती और धर्म आधारित सहुलते तथा आरक्षण  दिया जाता है .अगर  संविधान में समता और  ''पिछड़े जाती का उत्थान ''इन दोनों तत्वों का प्रावधान  है ,तो एक के लिए दुसरे तत्व को बाधा  पहुचाने के बजाय,कुछ ऐसी तरकीब सोचना चाहिए की दोनों उद्देश सफल हो ,मसलन ,आरक्षण छोड़कर ,अन्य  ऐसे पर्याय जो पिछड़े जाती  के लोगो को आगे लाने के लिए कारगर हो .क्यों की समता तो जनसत्ता का  मुलभुत तत्व है।   
   ज़रा  सोचिये,
1)अगर कोई गरीब काबिल है लेकिन आरक्षण प्रवर्ग में नहीं आता तो उस पद पर उससे कम मार्क वाला ''आरक्षित'' बिठाया जाता है .देश के ५० प्रतिशत कर्मचारी और नेता भी इसी भेदभाव निति  द्वारा चुने जाते है .
2)प्रशासन में दुसरे देशो  के मुकाबले अगर आधे लोग कमजोर है  ,तो क्यों न देश धीरे धीरे कमजोर हो? 
3)यानि हमारे देश की जो बौधिक संपदा है उसमे से लगभग आधी को ठुकरा दिया जाता है .अगर ऐसा नहीं होता तो आज यह देश कुछ  और ही होता .
4)चीन ,जापान ,और अमेरिका के मुकाबले हम बहोत पिछड़ गए है और दिन  ब दिन 'रुपय्या'' की तरह लुढ़क रहे है .
5)जरा सोचिये,ये कितनी मुर्खता है की वोटरों को  उनके सही पसंदीदा /काबिल उमीदवार के बजाय किसी जाती विषेश/प्रवर्ग  के उमिदवारोंको वोट देने पर बाध्य किया जाता है ,क्या यही है  डेमोक्रेसी यानि की जनसताक पद्धति  ?
लेकिन आरक्षण वाले इसका कडा विरोध करते है और भ्रष्ट पार्टिया   जादा से जादा जातियोंको आरक्षण प्रवर्ग में लाकर अपनी सता को शास्वत कर ने में लगी है  और उनके साथ साथ भ्रष्टाचार भी शास्वत हो रहा है 

लेकीन 
क्या ,आरक्षण  से सबको  फायदा होता है ? 
जी  नहि ,सिर्फ फायदा होणे का  चान्स रहता है यानि आरक्षण ,एक लाटरी  की तरह होता है , लाटरी लगती है एक को लेकिन टिकेट लेने वाले लालची लोग लाखो होते है ,यानी के वो सब ,चान्स  लेते है ,मतलब महेनत और इमानदारी के बजाय फोकट वाले सिस्टम का पुरस्कार करते है .यह प्रवृति जादातर   लोगो  में  है ,इसी लिए काम करने वाली पार्टी या उमिदवारो  के बजाय ,लालच दिखाने वाली पार्टिया ,चुनाव  जितती आयी  है। इस तरह भ्रष्टाचार आरक्षण का रक्षण करताहै  और आरक्षण भ्रष्टाचार को मजबूत करता है 
मतलब ,इस देश की मुख्य समस्याए  सिर्फ  दो है करप्शन  और आरक्षण  बस ,बाकी सभी समस्याए  इन से ही पैदा हुई है .यानि की महंगाई ,गरीबी , किसानो की आत्महत्याए ,अन्न ,वस्त्र ,घर ,और विशेषताः पानी की  किल्लत या फिर रुपये का अवमूल्यन ,आतंकवाद ,घुसपैठ .अगर इन सभी समस्या ओ की माँ भ्रष्टाचार है तो बाप  है आरक्षण .


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