आरक्षण और करप्शन दोनों का परिणाम =कमजोर देश

    आरक्षण और करप्शन दोनों का परिणाम =कमजोर देश
    कुछ दिन  पहले परराष्ट्र  मंत्री ने सयुक्त राष्ट्र सभा में पोर्तुगाल के मंत्री का भाषण पढ़ डाला,जबकि उन्हें भारत   का पक्ष दुनिया के सामने रखने के लिए भेजा गया था .उन्होंने यह साबित कर दिया की वह उस मंत्री  पद के काबिल नहीं है .दुनिया को भी यह पता चल गया की भारत में गुणवत्ता के आधार पर पद नहीं भरे जाते और यही बात सच है.हमारे यहाँ या तो करप्शन द्वारा यानि पैसा लेकर या शिफारिस से बड़े और छोटे पदों पर नियुक्ति की जाती है या फिर आरक्षण द्वारा बुद्धिमान और काबिल लोगो को हटाकर कर्मचारी और राजकर्ता  की भी भरती की जाती है  दोनों प्रकारो में देश को चलाने के लिए जो  लायक है ऐसे लोगो को किनारे किया जाता है 
  हाल ही में पता चला है की काबिल व्यक्ति को हटाकर अपने शिफारिश के टटू की भरती करने की प्रक्रिया की नीव हमारे पूज्य बापूजी ने रखी थी उन्होंने वल्लभभाई पटेल  को बहुसंख्य लोगों द्वारा चुनने के बावजूद प्रधान मंत्री पद के लिए जवाहर लाल नेहेरू की शिफारिस करते हुवे उन्हें   सिहासन पर बिठाया .लोग हमेशा महात्मा के नक़्शे कदम पर चलते है आगे क्या होता गया  सब जानते है .क्या ये देश इसी वजह से कमजोर नहीं हुवा  है?     पाकिस्तान ने कई बार हमला किया .आधे से ज्यादा कश्मीर पर कब्जा कर लिया ,चीन ने तिबेट तो हटिया लिया ही ऊपर से १०० वर्ग की.मी. जमीं भी कब्जे में कर ली है  अब तो वह अरुणा चल प्रदेश पर भी अपना दावा  कर रहा है .अगर यह देश इसीतरह नालायक लोगो के हात में रहे गा तो एक दिन फिर से गुलामी/परतंत्र में जाने का डर   है क्यों के अमेरिका और चीन में आरक्षण नहीं है और करप्शन  बहोत कम  है .ऐसे बलवान शत्रु नालायक लोगो द्वारा चलाये जारहे देश को सहज हाराने  का  साहस करने के बारेमे  सोच सकते है या नही?.
 कोई माने या ना माने बाबा का आरक्षण भी देश को कमजोर करने में  भूमिका कर रहा है जरा सोचिये  जब हमें अपने सोसाइटी या फार्म के लिए वाचमन रखना हो तो क्या हम ज्यादा से ज्यादा काबिल व्यक्ति का चlयन नहीं करते ?या  इसके बजाय उसकी गरीबी या आरक्षण प्रवर्ग देखते है ?कोई आरक्षण समर्थक कम काबिलियत वाले नोकर को निजी काम के लिए नहीं रखेगा अगर उसे उतनेही पैसो में ज्यादा होशियार ,हटाकटा नौकर मिले,या फिर क्या ऐसा हो सकता है की आप बीमार है और इलाज के लिए आप किसी ..
कम काबिल डॉक्टर के पास इस लिए जा रहे है के वह  आरक्षित प्रवर्ग का है? जब के आप के सामने ही एक काबिल डॉक्टर है ,जिसकी जाती मालूम नही है.जी नही ऐसा नही हो सकता .   
    खुद   के लिए हम अछि से अछी  सेवा और सेवक का ही चयन करते है फिर देश के लिए ऐसा क्यों?   सरकारी   नौकर के काबिलियत के बजाय उसकी जाती   क्यो देखते है ?देश कमजोर हुवा तो चलेगा?    
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Post by TPHJ.


Comments

Mukesh said…
अच्छी शुरुआत।
शोभनम्।
स्वागत है आपका
आइये हिन्दी
एवं हिन्दी ब्लॉग जगत् को सुशोभित कीजिये
इसे समृद्ध बनाइये।
ब्लॉग की दुनिया में आपका स्वागत,हिंदी जगत में उत्तरप्रदेश ब्लोगेर असोसिएसन uttarpradeshbloggerassociation.blogspot.com ब्लोगेरो की एक बड़ी संस्था बन रही है. आप इसके प्रशंसक बनकर हमारा उत्साह वर्धन करें. इस सामुदायिक चिट्ठे पर लेखक बनने के लिए अपना मेल आईडी इस पते पर भेंजे, साथ ही इसका अनुसरण करें. indianbloger@gamil.com , इसके बाद आपको एक निमंत्रण मिलेगा और उसे स्वीकार करते ही आप इसके लेखक बन जायेंगे.
सुन्दर अभिब्यक्ति| धन्यवाद|
Anonymous said…
"भारत में गुणवत्ता के आधार पर पद नहीं भरे जाते
...
नौकर के काबिलियत के बजाय उसकी जाती क्यो देखते है"

चिंतनीय तथा निंदनीय
इस सुंदर से चिट्ठे के साथ आपका हिंदी चिट्ठा जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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