गोरखपूर ट्रॅजेडी :की माँ करप्शन है तो बाप है आरक्षण .

 गोरखपूर ट्रॅजेडी :की माँ करप्शन है तो बाप है आरक्षण .
सरकार किसकी भी आये  जब तक सरकारी यंत्रना  वही पुरानी  है गोरखपूर ट्रॅजेडी जैशी घटनाये रोकना मुश्किल है 
हो सकता है गोरखपूर ट्रॅजेडीवाले भ्रष्ट अस्पताल  प्रशासन ने ऑक्सिजन सप्लायर का बिल -पैसा खाने  के लिये बडा चढाकर निकालनेकी कोशिश करी  हो (पूरे देश मे 'जहा बिल वहा डील'सरकारी कार्यालयो मे अक्सर होताही है )  
 जिसकि डीलिंग के तहत -किसका हिस्सा कितनावाले बहस मे- उस कंपनी ने  ऑक्सिजन सप्लाय बंद कर दिया 
इस तरह भ्रष्ट और देशद्रोही  लोगोंको योगीजी पर इसका अपश्रेय थोपने का मोका मिल गया      
जी हा देश की लगभग सभी समस्या ओ का कारण या जड़ करप्शन  और आरक्षण है .करप्शन   की वजह से देश किस तरह बरबाद हो रहा है ये तो सभी जानते है .लेकिन इमानदार ,मेहनती और काबिल लोगो को प्रशासन और सत्ता से बहार फ़ेंक कर भेदभाव को बढाने वाला रोग है आरक्षण .किसी भी पद पर जब कम काबिल कर्मचारी  होता है तो वह खुद तो भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है ही लेकिन उसके कुप्रशासन  की वजह से भ्रष्टाचार और बढ़ ज्याता है  ,
हमारा संविधान कहता है ''स्वतंत्रता ,समता ,और बंधुता''उसकी नीव है ..बाकी  सब  ठीक है लेकिन ''समता'' किधर है ?  संविधान के एक अन्य  कलम  के आधार पर ,जाती और धर्म आधारित सहुलते तथा आरक्षण  दिया जाता है .अगर  संविधान में समता और  ''पिछड़े जाती का उत्थान ''इन दोनों तत्वों का प्रावधान  है ,तो एक के लिए दुसरे तत्व को बाधा  पहुचाने के बजाय,कुछ ऐसी तरकीब सोचना चाहिए की दोनों उद्देश सफल हो ,मसलन ,आरक्षण छोड़कर ,अन्य  ऐसे पर्याय जो पिछड़े जाती  के लोगो को आगे लाने के लिए कारगर हो .क्यों की समता तो जनसत्ता का  मुलभुत तत्व है।   
   ज़रा  सोचिये,
1)अगर कोई गरीब काबिल है लेकिन आरक्षण प्रवर्ग में नहीं आता तो उस पद पर उससे कम मार्क वाला ''आरक्षित'' बिठाया जाता है .देश के ५० प्रतिशत कर्मचारी और नेता भी इसी भेदभाव निति  द्वारा चुने जाते है .
2)प्रशासन में दुसरे देशो  के मुकाबले अगर आधे लोग कमजोर है  ,तो क्यों न देश धीरे धीरे कमजोर हो? 
3)यानि हमारे देश की जो बौधिक संपदा है उसमे से लगभग आधी को ठुकरा दिया जाता है .अगर ऐसा नहीं होता तो आज यह देश कुछ  और ही होता .
4)चीन ,जापान ,और अमेरिका के मुकाबले हम बहोत पिछड़ गए है और दिन  ब दिन 'रुपय्या'' की तरह लुढ़क रहे है .
5)जरा सोचिये,ये कितनी मुर्खता है की वोटरों को  उनके सही पसंदीदा /काबिल उमीदवार के बजाय किसी जाती विषेश/प्रवर्ग  के उमिदवारोंको वोट देने पर बाध्य किया जाता है ,क्या यही है  डेमोक्रेसी यानि की जनसताक पद्धति  ?
लेकिन आरक्षण वाले इसका कडा विरोध करते है और भ्रष्ट पार्टिया   जादा से जादा जातियोंको आरक्षण प्रवर्ग में लाकर अपनी सता को शास्वत कर ने में लगी है  और उनके साथ साथ भ्रष्टाचार भी शास्वत हो रहा है 

लेकीन 
क्या ,आरक्षण  से सबको  फायदा होता है ? 
जी  नहि ,सिर्फ फायदा होणे का  चान्स रहता है यानि आरक्षण ,एक लाटरी  की तरह होता है , लाटरी लगती है एक को लेकिन टिकेट लेने वाले लालची लोग लाखो होते है ,यानी के वो सब ,चान्स  लेते है ,मतलब महेनत और इमानदारी के बजाय फोकट वाले सिस्टम का पुरस्कार करते है .यह प्रवृति ज्यादा तर   लोगो  में  है ,इसी लिए काम करनेवाली पार्टी या उमिदवारो  के बजाय ,लालच दिखाने वाली पार्टिया ,चुनाव  जितती आयी  है।
 इस तरहा भ्रष्टाचार आरक्षण का रक्षण करताहै  और आरक्षण भ्रष्टाचार को मजबूत करता है 
मतलब ,इस देश की मुख्य समस्याए  सिर्फ  दो है करप्शन  और आरक्षण  बस ,बाकी सभी समस्याए  इन से ही पैदा हुई है .यानि की महंगाई ,गरीबी , किसानो की आत्महत्याए ,अन्न ,वस्त्र ,घर ,और विशेषताः पानी की  किल्लत या फिर रुपये का अवमूल्यन ,आतंकवाद ,
घुसपैठ   और अब -
         '' गोरखपूर ट्रॅजेडी''
अगर इन सभी समस्या ओ की माँ भ्रष्टाचार है तो बाप  है आरक्षण .
(based on     http://satyatru.blogspot.in/2017/11/the-zero-corruptiontheory-by.html)

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