ग्लोबल वार्मिंग पर उपाय


ग्लोबल वार्मिंग पर उपाय 




सब लोग जानते है ग्लोबल वार्मिंग =प्रदूषण =शहरीकरन है .लेकिन इस लिये  
शहर छोडकर गाव के तरफ जनप्रवाह  का यू टर्न करना  कोई सामान्य बात नही है !  
यह  एक व्यक्ती की नही ,केवल  किसी  समाज की नही  ,सिर्फ एक दो देशों कि भी नही,संपूर्ण विश्व कि व्यवस्था बदलने कि बात है. बदलना जरुरी है . इसके लिये पहले इस सोच को एक एक व्यक्ती मानता है ,फिर ,बहोत सारे व्यक्ती मानते है  इस तरह  पुरा समाज मानता है ,समाज मानता है तो यह लहर देश व्यापी बनती है . तब देशमे इस विचार को मानने वाली सरकार आती है . सरकार मे बैठे लोग जनप्रवाह को विपरीत दिशा मे याने गाव कि तरफ भेजने के लिये गावो मे चरितार्थ संसाधन निर्माण करणे लगते है. ऐसे संसाधन उस देश के भौगोलिक संपदा पर आधारित होते है . भारत के लिये खेती और उसपर आधारित उद्योग विकासीत  करने  होंगे  . लेकिन पश्चिमी देशोंके विकास मॉडेल को अपने आधीन(स्वतंत्रता पूर्व भारत )  हर एक देश पर थोपने के लिये बनाई गयी शिक्षण व्यवस्था मे खेती को कोई स्थान नही है,इस लिये हर  नयी पिढी खेती से दूर जा रही है.इस लिये स्कूल तथा कॉलेजो मे १०० मार्क का खेती विषय अनिवार्य किया जाना  चाहिये.ताकि युवावो मे खेती के लिये आस्था बने . वर्ना वो फिलहाल तो खेती बेच कर चपराशी कि नौकरी खरीदनेके स्थिती मे है . इस लिये जरुरी है ----  

किसान क्रांती -
नए विचार और तंत्रो को सिर्फ युवक ही स्वीकार सकते है ऐसा हुवा तो भारत में क्रान्ति होगी।
हमारा मतलब ‘’शिक्षण व्यवस्था में बुनियादी परिवर्तन लाने से है POITICAL SCIENCE , HISTORY ,SOCIOLOGY जैसे विषय अगर कोई घर बैठे पढ कर पास हो सकता है तो उसके लिये १०, १२ साल बरबाद क्यो करे? यह विषय अब लगभग GK कि तऱ्ह हो गये है
लेकीन ऐसी शिक्षण व्यवस्था का भयानक परिणाम यह है की BA , MA करणे वाला छात्र खेतो मे मुश्कील से हि काम करेगा छोटी सी नौकरी के पीछे सालो साल बरबाद करेगा , क्यूंकि उसमे क्लार्क प्रवृति निर्माण होगी।
परन्तु ,अगर इन विषयोंके साथ साथ आधुनिक खेती का प्रैक्टिकल अनिवार्य कर दिया तो उसमे अपने आप किसान प्रवृति(ATTITUDE) निर्माण होगी जिससे बेरोजगारी के आलम में वह अपने आप अाधुनिक खेती के तरफ अपना रुख करेगा।
वरना ज्यादा तर किसान पारम्परिक खेती करना नहीं छोड़ सकते , आधुनिक खेती करने केलिए प्रोत्साहित करने वाली सरकारी योजनाये या सबसिडी का ख़ास उपयोग इस देश में नहीं हो सकता ,यहाँ लोग झुटे दस्तावेज बनाकर सुब्सिडिया खा जाते है
इस लिए युवा वर्ग को ऐसी शिक्षा देना जरुरी है क्यूं कि नए विचार और तंत्रो को सिर्फ युवक ही स्वीकार सकते है ऐसा हुवा तो भारत में क्रान्ति होगी।

कौन नही चाहता अपना देश भी सुन्दर हो !
लेकिन उसके लिए पहिले गांवो का विकास होना चाहिए ,
गाँव के विकास के लिए ,लोग गांवो में रहने चाहिए
लेकिन इसके लिए पढ़े लिखे लोगो को
शहरों की नौकरी से भी ज्यादा अच्छा रोजगार वही पर मिलना चाहिए 
ऐसा तो सिर्फ ‘’ MODERN KISAN’’ ही कर सकता है
… फिर असली नयी प्रेमकहानिया बनेगी ; बिलकुल देशी !
युवक युवतियां खेतो में बागो में मिलेंगे
विशाल नील गगन के तले वह एक अनोखी दुनिया होगी
हर एक लिए थोडीशी जमी ,थोड़ा आसमान ही नहीं बहुत होगा, सब कुछ अपने अंदाज में।
चाँद तारे और नजरोंका खजाना और ये भी हो सकता

बसंत ऋतु की एक चांदनी रातसी कविता
छत पर ओ खड़ी शरमाईसी , कोई नहीं था
गालों पर लाल मेघ टहल रहे थे
हृदय यंत्र चरम गति से चल रहे थे
अपनेही हातोसे चेहरा ज़रा छुपाया था
छत पर ओ खड़ी शरमाईसी , कोई नहीं था
(TRANSLETED FROM FOLLOWING MARATHI POEM OF-RAJA RAGHUPATI)
वासंतिक उत्तर रात्री पिठ्ठ चांदण्यात
छतावरी लाजरी आणि एकांत //धृ //
लज्जेचे लाल मेघ गालावर दाटले
हृदयीच्या स्पंदनानी उचांक गाठले
हाता आड लपवी चेहरा आणी हसे आत
छतावरी लाजरी आणि एकांत …. वासंतिक उत्तर रात्री पिठ्ठ चांदण्यात //१//धृ


               

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