पदुकोन दृष्टीकोन = मनुष प्राणी
पदुकोन दृष्टीकोन = मनुष प्राणी
अनीमल प्लनेट chanel बताता है, एक मादा बंदर एक प्रजनन ऋतू मे कमसे कम चार नर बंदरो से सहवास करती है ,उसे पुरी आजादी है वैसी आजादी मनुष समाज भी अपना सकता है ,लेकिन यह कोई नया, आधुनिक दृष्टीकोन नही हो सकता यह तो जानवर स्तर कि सोच है क्यू की उत्क्रांती के प्रारंभिक अवस्था मे मनुष ने ऐसा तो किया ही होगा . अमेरिकन संस्कृती प्रारंभिक अवस्था मे है तो उनकी सोच भी प्रनियो वाली हि होगी ना तो उसको हम क्यू फालो करे ?उधर तो स्त्री पुरुष नर मादा स्तर पार हि है जहा सिर्फ अपने शरीर के सुख को महत्व दिया ज्याता है स्त्री पुरुष शादी कर के या बगैर शादी के ,जुड जाते है ,वे लोग प्राणियो के तऱ्हा अपने माबाप को पहले छोड देते है और फिर एक दुसरे के प्रती शारीरिक आकर्षण खत्म होते ही रिस्ता भी खत्म कर देते है अपने शरीर सुख के आगे वे बचोंकी भी पर्वा नही करते प्राणी बिलकुल ऐसे हि करते है नया प्रजनन ऋतू नया साथी ! इससे होता ये है -की बच्चों को जवान होते होते इस बात का पता करना मुश्किल पड जाता है - की उनकी सगी मा कौनसे नंबर के सौतेले बाप के साथ कौनसे गाव मे रहती है और कुछ बचोंको अकेली मा तो संभालती है लेकिन उनका वास्तविक बाप बिबिया बदलते बदलते न जाने कौनसे नंबर के सौतेलि मा के साथ रहता है- थोडे ऐसे भी होंगे जिनके मा और बाप अलग अलग रूट पकड कर विपरीत दिशा मे ‘’संपर्क क्षेत्र के बाहर गये हो …’’ तभी तो ss ताभितो वे लोग मदर्स डे ,और फादर्स डे मनाते है ता के वे अपनी असली
जन्मदाताओ का गुगल सर्च करे . यह मुक्त काम व्यवस्था ऐसे घृणास्पद मोड पार आगयी है आ गयी के पिछले दिनो एक अमेरिकन बाप को पहली पत्नी से पैदा हुई बच्ची पर और बच्ची को बाप पर ‘’पदुकोन दृष्टीकोन’’ आ गया दोनो चल पडे दुनिया वालो से दूर भेड बकरी या फिर किसी भी जानवर प्रजाती कि तरह अपनी आदिम प्रेरणा की पूर्ती करने के लिये.
वैसे सन्माननीय प्रकाश पदुकोन जी नामी खिलाडी थे और वे एक सुसंस्कृत भारतीय पिता भी है ,इसका खयाल मिस पदुकोन को रखणा चाहिये . 
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