भारत मे कृषी शिक्षा अनिवार्य हो . लेखक -राजा रघुपती
भारत मे कृषी शिक्षा अनिवार्य हो लेखक -राजा रघुपती
''जिस तरह दुनिया के कुछ देशो मे सैनिकी शिक्षा (मिलिटरी एज्युकेशन)अनिवार्य होती है उसी तरह भारत में सबके लिए कृषी शिक्षा अनिवार्य हो '' --राजा रघुपती
आजकल खेतो में काम करने के लिए मजदूर नहीं मिलते ,लेकिन शहरो में उच्च शिक्षित बेरोजगारो की भीड़ बढ़ती ही जा रही हैं जो BA ,MA है उनमे से कई लोग किसी छोटे मोटे होटल मे वेटर का काम या सेल्स मनशिप या फिर अन्य २ ,३ हजार महीने वाली नौकरी कर करते है ,देखा जाए तो ,ये लोग पदवीधर होते हुए भी आखिर किसी ना किसी प्रकार की मजदूरी ही कर रहे है ,लेकिन ऐसे काम को कोई आंग्रेजी नाम जैसे सेल्स एक्सिक्यूटिव ,फिल्ड ऑफिसर यहा तक के मैनेजर भी कहलाकर उसमे झूठा समाधान मानते है ,कुछ लोग तो पूरी जिंदगी शहर के किसी गट्टर के किनारे जिंदगी बसर करते है लोकल गाडियों की भीड़ में हर रोज मरणांतक पीड़ा सहते है लेकिन इस घुटन भरी जिंदगी से कभी कभार बाहर आकर जब अपने गांव एक दो दिन के लिए जाते है तो वहा के खुला आकाश,निर्मल वायु ,बडासा घर उससे भी बड़ा आँगन ऐसे वैभव का मालिक; जो किसान ,जो इनकी तुलना में राजा की तरह जिंदगी बसर करता है उसके पास शहर की चक्का चौंध और उसमे अपनी काल्पनिक शानोशौक़त का ऐसा वर्णन करते है मानो इनके सामने वह किसान भिकारी है। फिर उस किसान के मन में भी यह बात जाकर बसती है की गांव में कुछ भी नहीं है, तरकी करनी है तो शहर जाना चाहिए लेकिन वह खुद नहीं जा सकता लेकिन इस मानसिकता की वजह से उसकी अगली पीढ़ी खेती नहीं कर सकती। वह लोग अपनी खेती किसी मोटी तनखा वाले बाबू या फिर छटे या सातवे वेतन आयोग का भारी भरकम बकाया पानेवाले प्रोफ़ेसर को बेच देता है और उसमे से मिले हुए लाखो रुपये ले दे कर सरकारी नौकरी खरीद लेता है। इस तरह भारत की विरासत और बलस्थान यानी की खेती तेजी से नष्ट हो रही है। यह सब अंग्रेजो के बनाये हुए शिक्षा पद्धति का परिणाम है ,जिससे शहरीकरण बढता है ,अंग्रेजो के देश में खेती नहीं है ,इस लिए उन्होंने ऐसा किया BA ,MA करने में १० साल अटकाकर लोगो को निकम्मा और लाचार कर दिया।
छोडो , अंग्रेज तो गए साठ साल हो गए ,उन्होंने जाने अनजाने में कुछ अच्छा भी किया ,अब सरकार भी बदल गयी ,क्यों ना,युवा शक्ति को सही दिशा में मोड़ने के लिए शिक्षा पध्दती बदली जाय ताकि खेती में काम करने वालो की प्रतिष्ठा और आमदनी किसी बाबू से कम न हो. और इसका मूल सिद्धांत यह होगा --
''जिस तरह दुनिया के कुछ देशो मे सैनिकी शिक्षा (मिलिटरी एजुकेशन)अनिवार्य होती है उसी तरह भारत में सबके लिए कृषी शिक्षा अनिवार्य हो ''
१. लेकिन फिलहाल सिर्फ आर्ट फैकल्टी के लिए ११ वि से लेकर MA तक मौजूदा विषयों के साथ साथ और एक कंपल्सरी सब्जेक्ट-'' आधुनिक खेती'' जिसमे ७० मार्क का प्रैक्टिकल और ३० मार्क्स की थियरी हो
२. प्रैक्टिकल के लिए महाविद्यालयों के मैदानों में ग्रीन हाउस तथा अन्य एग्रीकल्चरल वर्क शॉप्स और लॅब बने
3)हर युनिव्हर्सिटी का syllabus उस प्रदेश में जिस तरह की खेती हो सकती है उसके अनुसार हो
३। खेती और जंगल भी बच जायेंगे प्रदुषण कम होगा निर्मल जल वायु और हरी भरी धरती से स्वास्थ और खुशहाली बढ़ेगी
''जिस तरह दुनिया के कुछ देशो मे सैनिकी शिक्षा (मिलिटरी एज्युकेशन)अनिवार्य होती है उसी तरह भारत में सबके लिए कृषी शिक्षा अनिवार्य हो '' --राजा रघुपती
आजकल खेतो में काम करने के लिए मजदूर नहीं मिलते ,लेकिन शहरो में उच्च शिक्षित बेरोजगारो की भीड़ बढ़ती ही जा रही हैं जो BA ,MA है उनमे से कई लोग किसी छोटे मोटे होटल मे वेटर का काम या सेल्स मनशिप या फिर अन्य २ ,३ हजार महीने वाली नौकरी कर करते है ,देखा जाए तो ,ये लोग पदवीधर होते हुए भी आखिर किसी ना किसी प्रकार की मजदूरी ही कर रहे है ,लेकिन ऐसे काम को कोई आंग्रेजी नाम जैसे सेल्स एक्सिक्यूटिव ,फिल्ड ऑफिसर यहा तक के मैनेजर भी कहलाकर उसमे झूठा समाधान मानते है ,कुछ लोग तो पूरी जिंदगी शहर के किसी गट्टर के किनारे जिंदगी बसर करते है लोकल गाडियों की भीड़ में हर रोज मरणांतक पीड़ा सहते है लेकिन इस घुटन भरी जिंदगी से कभी कभार बाहर आकर जब अपने गांव एक दो दिन के लिए जाते है तो वहा के खुला आकाश,निर्मल वायु ,बडासा घर उससे भी बड़ा आँगन ऐसे वैभव का मालिक; जो किसान ,जो इनकी तुलना में राजा की तरह जिंदगी बसर करता है उसके पास शहर की चक्का चौंध और उसमे अपनी काल्पनिक शानोशौक़त का ऐसा वर्णन करते है मानो इनके सामने वह किसान भिकारी है। फिर उस किसान के मन में भी यह बात जाकर बसती है की गांव में कुछ भी नहीं है, तरकी करनी है तो शहर जाना चाहिए लेकिन वह खुद नहीं जा सकता लेकिन इस मानसिकता की वजह से उसकी अगली पीढ़ी खेती नहीं कर सकती। वह लोग अपनी खेती किसी मोटी तनखा वाले बाबू या फिर छटे या सातवे वेतन आयोग का भारी भरकम बकाया पानेवाले प्रोफ़ेसर को बेच देता है और उसमे से मिले हुए लाखो रुपये ले दे कर सरकारी नौकरी खरीद लेता है। इस तरह भारत की विरासत और बलस्थान यानी की खेती तेजी से नष्ट हो रही है। यह सब अंग्रेजो के बनाये हुए शिक्षा पद्धति का परिणाम है ,जिससे शहरीकरण बढता है ,अंग्रेजो के देश में खेती नहीं है ,इस लिए उन्होंने ऐसा किया BA ,MA करने में १० साल अटकाकर लोगो को निकम्मा और लाचार कर दिया।
छोडो , अंग्रेज तो गए साठ साल हो गए ,उन्होंने जाने अनजाने में कुछ अच्छा भी किया ,अब सरकार भी बदल गयी ,क्यों ना,युवा शक्ति को सही दिशा में मोड़ने के लिए शिक्षा पध्दती बदली जाय ताकि खेती में काम करने वालो की प्रतिष्ठा और आमदनी किसी बाबू से कम न हो. और इसका मूल सिद्धांत यह होगा --
''जिस तरह दुनिया के कुछ देशो मे सैनिकी शिक्षा (मिलिटरी एजुकेशन)अनिवार्य होती है उसी तरह भारत में सबके लिए कृषी शिक्षा अनिवार्य हो ''
१. लेकिन फिलहाल सिर्फ आर्ट फैकल्टी के लिए ११ वि से लेकर MA तक मौजूदा विषयों के साथ साथ और एक कंपल्सरी सब्जेक्ट-'' आधुनिक खेती'' जिसमे ७० मार्क का प्रैक्टिकल और ३० मार्क्स की थियरी हो
२. प्रैक्टिकल के लिए महाविद्यालयों के मैदानों में ग्रीन हाउस तथा अन्य एग्रीकल्चरल वर्क शॉप्स और लॅब बने
4 . सरकारी एग्रीकल्चर कंपनिया स्थापित हो ,जो अपने कर्मचारियों द्वारा आधुनिक खेती करे ,जिसमे उक्त प्रशिक्षित छात्रोंको काम मिले
इस पध्दति के फायदे
१.भारत की युवा शक्ति को नयी दिशा मिलेगी १० साल पढ़ाई के बाद नौकरी पाने के लिए समय शक्ति और पूंजी बरबाद करने के बजाय युवक युवतियो में किसान प्रवृति निर्माण होने के कारण वे आधुनिक खेती के तरफ बढ़ेंगे
2 . सरकारी एग्रीकल्चर कंपनिया स्थापित होते ही ,बड़े प्रगतिशील किसान तथा कार्पोरेट कंपनिया भी इस उद्योग में उत्तर सकती है ,क्यू की महाविद्यालयो द्वारा प्रशिक्षित मानव संसाधन की कोई कमी नहीं होगी
क्या करना होगा? शिक्षा व्यवस्थामे इस तरह का परिवर्तन लाने के लिए इस ब्लॉग की लाखो कॉपीया -दुनिया के सबसे अच्छे प्रधानमन्त्री,देशहित में तुरंत निर्णय लेने में जिनका कोई जवाब नहीं ऐसे-
आ.श्री नरेंद्र भाई मोदीजी
तथा मानव संसाधन मंत्री -
आ. श्रीमती स्मृति ईरानीजी तक पहुंचे-
भारत मे कृषी शिक्षा अनिवार्य हो राजा रघुपती
मुंबई







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