सुरज के पास हनुमान जी कैसे गये ?

कोई भी जीवित या निर्जीव वस्तू सुरज के पास जा नही सकती फिर हनुमान जी कैसे गये ?
    माना तो  यह एक हकीकत है मगर गहराई मे जाकर चिंतन करो तो उसमे महान व्यावहारिक ,अर्थात  जीवन उपयोगी ज्ञान है अगर यह ज्ञान सिर्फ एक वाक्य मे दिया जाता तो वह कुच्छ इस तऱ्ह का वचन होता
''सूर्य उदय दर्शन से समस्त वरदान मिलते है '' 
सही बात  है ,सूर्य दर्शन से आरोग्य लाभ होता ही है लेकीन मन प्रसन्न होकार उसमे इतनी उर्जा भर जाती है कि मनुष  कोई भी वरदान पाने मे सक्षम बन जायेगा ; इतना - तो एक नास्तिक भी मान जायेगा लेकीन जिसके पास श्रद्धा कि शक्ती है उसे तो जो चाहे मिल सकता है यांनी अनागीनत लाभ !! यह अनुभव है. 
लेकीन किताबी धर्म पंथ और हिंदू दर्शन मे यही फर्क है हमारे यहा सब ज्ञान जीवन के पुस्तक मे हि उपलब्ध होता है जो कभी नष्ट नही होता क्यो कि ये समय के मंडलाकार आकाशिय  कलेंडर पर लिखा जाता  है . यांनी कि पौर्णिमा ,अमावास्या त्तीथिया त्योहार व्रत तथा दिन विशेष कि कथा  से जुडा हुवा होता है . हनुमान उड्डान जैसी शेंकडो अदभूत कथाये भुलाये नही भुलती क्यो की हर साल हनुमान जयंती उसी चैत्र पौर्णिमा   के दिन मनाई जाती है और  जब कथा  ऐसी   असाधारण और अदभूत हो तो …  कौन भूलेगा ?    
पैदा होते हि हनुमान जी ने सुरज के तरफ उड्डाण किया वह ''लाल  फल'' पाने के लिये. उसके बाद इंद्र द्वारा वज्र प्रहार से उन्हे गीराया गया तब उनके मानस पिता ''वायू'' क्रोधीत हुये ओर रुक  गये ,उनके अभाव से श्रुष्टी मृतप्राय होणे लगी . वायू को मनाने के लिये सभी देवताओ  ने उनके पुत्र हनुमान को बहोतसे  वरदान दिये . 
 जय हनुमान !  

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