क्या अगला आंदोलन आरक्षण के खिलाप होगा ?दादाजी के गुनाहो के लिए पोते

            करप्शन विरोध के बाद  क्या अगला आंदोलन आरक्षण के खिलाप होगा  ?
 जी हां अगर लोगो मे इसी तरह जाग्रति होती रही तो जल्द ही सबके ध्यान में आ जायगा -आरक्षण एक सामजिक अन्याय है।और दुनिया के तुलना में भारत को पिछड़ने का एक कारन है। 
किसी जाती विशेष के पूर्वजो पर दूसरे जाती विशेष के पूर्वजो ने जो कथित अन्याय किये है उसकि सजा यानि दादाजी के गुनाहो के लिए पोते के नौकरी या शिक्षा के अवसर को  नकारना  या  छीनना उचित नहीं है.यह बात दुनिया के किसी भी देश के ,किसी भी जमाने के कानून के खिलाप है। यह भेदभाव पूर्ण कानून मूलतः हमारे  संविधान के ''समता'' तत्व के बिलकुल विरुद्ध है। 
जहा संविधान में स्वतंत्रता ,और बंधुता के साथ'' समता' यानि धर्म ,जात ,लिंग ,भाषा के आधार पर भेदभाव ना करने कि बात  मुलभुत तत्व मानकर रखी है वही जाती और अब तो अल्पसंख्यक के नाम पर धर्म आधारित सहूलतें भी दी जा रही है। और विडम्बना देखिये इसी को ''सामाजिक न्याय ''कहा जाता है। 
इससे देश बरबाद हो रहा है क्यों कि आधे से जादा कर्मचारी काबिलियत को गौण महत्व देकर जाती के आधार पर भरे जाते है। और देश चलाने के लिए जो नेता चुने जाते है वे भी आरक्षण (५०%) से !क्या पकिस्तान या चाइना में यह सिस्टम है ? नहीं ना? तो फिर उनके  जादा से जादा काबिल नेता और अधिकारियो   का  सामना करने के लिए हमारे पास भी अच्छे प्रशासक व नेता जो सिर्फ उनके मेरिट पर  चुने गए हो -ऐसे ही चाहिए। लेकिन इस सत्य का स्वीकार करने के लिए लोग तैयार नहीं है क्यों कि आरक्षण के वजह से जातीयवाद का जहर बहुत ही फ़ैल चूका है अब तो अगड़ी जातिया  भी आरक्षण  पाने के लिए आंदोलन कर रही है। 
लेकिन आगे का आंदोलन ''आरक्षण के विरोध में होना जरुरी है। ऐसा हो सकता है!   

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