अगर करप्शन मा है तो बाप है आरक्षण .

अगर करप्शन  मा है तो बाप है आरक्षण .
जी हा देश की लगभग सभी समस्या ओ का कारण या जड़ करप्शन    और आरक्षण है .करप्शन   की वजह से देश किस तरह बरबाद हो रहा है ये तो सभी जानते है .लेकिन इमानदार ,मेहनती और काबिल लोगो को प्रशासन और सत्ता से बहार फ़ेंक कर भेदभाव को बढाने वाला रोग है आरक्षण .किसी भी पद पर जब कम काबिल कर्मचारी या मंत्री /प्रधान मंत्री होता है तो वह खुद तो भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है ही लेकिन उसके कुप्रशासन  की वजह से भ्रष्टाचार और बढ़ ज्याता है  ,ये बात बहोत कम लोग समझ सकते है .
यानि आरक्षण खुद भष्टाचार का एक कारण है इस लिए ज्यादा भ्रष्ट पार्टिया ज्यादा आरक्षण  का लालच दिखाती है ,क्यों की आरक्षण समर्थक देश हित के बजाय जाती हित  को महत्व देते है ,यानि मानो  वो ऐसा कहते है '',चाहे भ्रष्टाचार करो या देश को लूटो ,लेकिन  भेद भाव की निति अपनाकर हमारे जाती को आगे बढ़ने का अवसर दो''और इसी के तहत ये आरक्षण प्रेमी सबसे ज्यादा भ्रष्ट पार्टी को इकठा वोट करते हुए बार बार  जिताते है .वो जानते है की अगर कोई पार्टी देश को बलवान बनाना चाहेगी तो वह आरक्षण और जाती के  आधार  पर भेद भाव करना बंद करके सिर्फ गुणवता पर आधारित समान न्याय वाली प्रणाली लाएगी ,जो की इन्हें बिलकुल पसंद नहीं .क्या  ये बात सच नहीं? .
मुस्लिम तुष्टिकरण के पीछे भी ,आरक्षण वाली मानसिकता ही है ,भ्रष्ट पार्टी को इसका बहुत फायदा होता है.
हमारा संविधान कहता है ''स्वतंत्रता ,समता ,और बंधुता''उसकी नीव है ..बाकी  सब  ठीक है लेकिन ''समता'' किधर है ?
 संविधान के एक अन्य  कलम  के आधार पर ,जाती और धर्म आधारित सहुलते तथा आरक्षण  दिया जाता है .अगर  संविधान में समता और  ''पिछड़े जाती का उत्थान ''इन दोनों तत्वों का प्रावधान  है ,तो एक के लिए दुसरे तत्व को बाधा  पहुचाने के बजाय,कुछ ऐसी तरकीब सोचना चाहिए की दोनों उद्देश सफल हो ,मसलन ,आरक्षण छोड़कर ,अन्य  ऐसे पर्याय जो पिछड़े जाती  के लोगो को आगे लाने के लिए कारगर हो .क्यों की समता तो जनसत्ता का  मुलभुत तत्व है।   
   ज़रा  सोचिये,
1)अगर कोई गरीब काबिल है लेकिन आरक्षण प्रवर्ग में नहीं आता तो उस पद पर उससे कम मार्क वाला ''आरक्षित'' बिठाया जाता है .देश के ५० प्रतिशत कर्मचारी और नेता भी इसी भेदभाव निति  द्वारा चुने जाते है .
2)प्रशासन में दुसरे देशो  के मुकाबले अगर आधे लोग कमजोर है  ,तो क्यों न देश धीरे धीरे कमजोर हो? 
3)यानि हमारे देश की जो बौधिक संपदा है उसमे से लगभग आधी को ठुकरा दिया जाता है .अगर ऐसा नहीं होता तो आज यह देश कुछ  और ही होता .
4)चीन ,जापान ,और अमेरिका के मुकाबले हम बहोत पिछड़ गए है और दिन  ब दिन 'रुपय्या'' की तरह लुढ़क रहे है .
5)जरा सोचिये,ये कितनी मुर्खता है की वोटरों को  उनके सही पसंदीदा /काबिल उमीदवार के बजाय किसी जाती विषेश/प्रवर्ग  के उमिदवारोंको वोट देने पर बाध्य किया जाता है ,क्या यही है  डेमोक्रेसी यानि की जनसताक पद्धति  ?
लेकिन आरक्षण वाले इसका कडा विरोध करते है और भ्रष्ट पार्टिया   जादा से जादा जातियोंको आरक्षण प्रवर्ग में लाकर अपनी सता को शास्वत कर ने में लगी है  और उनके साथ साथ भ्रष्टाचार भी शास्वत हो रहा है 

लेकीन 
क्या ,आरक्षण  से सबको  फायदा होता है ? 
जी  नहि ,सिर्फ फायदा होणे का  चान्स रहता है यानि आरक्षण ,एक लाटरी  की तरह होता है , लाटरी लगती है एक को लेकिन टिकेट लेने वाले लालची लोग लाखो होते है ,यानी के वो सब ,चान्स  लेते है ,मतलब महेनत और इमानदारी के बजाय फोकट वाले सिस्टम का पुरस्कार करते है .यह प्रवृति ज्यादा तर   लोगो  में  है ,इसी लिए काम करने वाली पार्टी या उमिदवारो  के बजाय ,लालच दिखाने वाली पार्टिया ,चुनाव  जितती आयी  है। इस तरहा भ्रष्टाचार आरक्षण का रक्षण करताहै  और आरक्षण भ्रष्टाचार को मजबूत करता है
मतलब ,इस देश की मुख्य समस्याए  सिर्फ  दो है करप्शन  और आरक्षण  बस ,बाकी सभी समस्याए  इन से ही पैदा हुई है .यानि की महंगाई ,गरीबी , किसानो की आत्महत्याए ,अन्न ,वस्त्र ,घर ,और विशेषताः पानी की  किल्लत या फिर रुपये का अवमूल्यन ,आतंकवाद ,घुसपैठ .अगर इन सभी समस्या ओ की माँ भ्रष्टाचार है तो बाप  है आरक्षण .



 

Comments

Raja raghupati said…
चाहिए एक ऐसी राजकीय पार्टी(political party) जो सभी क्षेत्रो से आरक्षण और भेदभाव को नष्ट करे ,वही उसका प्रमुख ध्येय हो .लेकिन जातीय वादी वोट पाने के लालच में कोई पार्टी इस बात को अपने अजेंडे में शामिल नहीं करती.सच बात तो यह है की आरक्षण ही देश के पिच्छ डे पण का एक मात्र कारण है ,जरा सोचिये हम 1947 में स्वतंत्र हुवा ,और जापान 1945 में अटम bomb से बेचिराख हुवा था .तोह फिर वह क्याबात है ,जापान ख़ाक होकर भी इतने सालो में एक संपन्न राष्ट्र बन गया और हमारा देश अभी भी पिछड़े राष्ट्रों के लिस्ट में और भी पिछ ड रहा है .बस एक ही मुलभुत फर्क है ,जापान में ''आरक्षण'' नहीं है .हर क्षेत्र में काम करने के लिए अछे से अछे लोगो का चयन किया जाताहै .भारत में होनहार और बुद्धिमान लोगो की कमी नहीं है लेकिन आरक्षण के नाम पर सता और प्रशासन में ,गुणवता या काबिलियत के बजाय जाती के आधार पर भर्ती की जाती है .सभी पार्टिया यह तथ्य जानती है ,पर मानती नहीं ,लेकिन आशार्य की बात तो यह है की पत्रकार और अन्य बुद्धिजीवी भी इस मुद्दे को नजर अंदाज करते है